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Medically Reviewed by Dr. Girish Tathed Director, Dr.Tathed's Homeopathy Clinic, MD (Homeopathy), Senior Consultant with 30+ years of clinical experience
📅 14-08-2026

अचानक त्वचा पर लाल, उभरे हुए और खुजली वाले दाने दिखाई देना कई लोगों के लिए यह अनुभव थोड़ा डरावना और परेशान करने वाला हो सकता है। अगर आप 'urticaria meaning in hindi', 'urticaria in hindi' या 'urticaria ka ilaj kya hai' जैसे सवाल खोज रहे हैं, तो आप अकेले नहीं हैं यह त्वचा से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य समस्या है, जिसे हिंदी में पित्ती या शीतपित्त भी कहा जाता है।

इस ब्लॉग में हम आसान हिंदी में समझेंगे कि पित्ती (urticaria) क्या होती है, यह क्यों होती है, इसके लक्षण क्या हैं, खान-पान में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, और होम्योपैथी इसमें किस तरह मदद कर सकती है।

Urticaria (पित्ती) का मतलब क्या है? 

पित्ती, जिसे मेडिकल भाषा में urticaria कहा जाता है, त्वचा से जुड़ी एक एलर्जिक स्थिति है। इसमें त्वचा पर अचानक लाल, उभरे हुए और खुजली वाले चकत्ते (wheals) बन जाते हैं। ये चकत्ते त्वचा के रंग के भी हो सकते हैं, और इनमें जलन या चुभन जैसा एहसास भी हो सकता है।

यह त्वचा के नीचे मौजूद कोशिकाओं से हिस्टामिन (histamine) और अन्य रसायनों के निकलने के कारण होता है। ज़्यादातर मामलों में पित्ती कुछ घंटों से लेकर कुछ दिनों में अपने आप ठीक हो जाती है और त्वचा पर कोई स्थायी निशान नहीं छोड़ती।

Urticaria (पित्ती) क्यों होता है? संभावित कारण

पित्ती होने का कोई एक निश्चित कारण नहीं होता। कई अलग-अलग चीज़ें इसे ट्रिगर कर सकती हैं।

1. एलर्जी और हिस्टामिन रिलीज़ 

शरीर में जब कोई चीज़ एलर्जी पैदा करती है, तो त्वचा की कोशिकाओं से हिस्टामिन निकलता है, जिससे लाल, खुजली वाले चकत्ते बनते हैं।

2. दवाइयां 

कुछ दवाइयों की प्रतिक्रिया से भी पित्ती हो सकती है।

3. खाद्य एलर्जी और कीड़े का काटना 

मूंगफली, अंडा, गेहूं और शेलफिश जैसे खाद्य पदार्थों से एलर्जी, या कीड़े-मकोड़ों के काटने से भी पित्ती हो सकती है।

4. तनाव

मानसिक तनाव भी पित्ती को ट्रिगर करने वाले कारकों में से एक माना जाता है।

5. ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया (दीर्घकालिक पित्ती में)

जिन लोगों को लंबे समय से पित्ती की समस्या रहती है और जिनका कारण साफ नहीं होता, उनमें से आधे से ज़्यादा मामलों में यह ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया की वजह से हो सकता है यानी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता खुद अपनी ही कोशिकाओं पर प्रतिक्रिया करने लगती है।

Urticaria (पित्ती) के लक्षण

  • त्वचा पर लाल या त्वचा के रंग के उभरे हुए, खुजली वाले चकत्ते
  • खुजली, जलन या चुभन जैसा एहसास
  • चकत्ते के बीच का हिस्सा दबाने पर सफेद पड़ जाना (blanching)
  • चकत्तों का आकार और जगह समय के साथ बदलते रहना

Urticaria (पित्ती) का होम्योपैथिक इलाज कैसे किया जाता है?

होम्योपैथी में पित्ती का इलाज केवल लक्षणों को दबाने के बजाय, इसके मूल कारण पर ध्यान देकर किया जाता है। इसे curative (उपचारात्मक) दृष्टिकोण कहा जाता है, न कि suppressive (दबाने वाला)। यह दृष्टिकोण खासतौर पर उन मरीज़ों के लिए मददगार माना जाता है जिन्हें बार-बार पित्ती होने की समस्या रहती है।

Apis Mellifica

जब त्वचा में तेज़ जलन और चुभन जैसी खुजली हो, और त्वचा छूने पर बहुत संवेदनशील महसूस हो। पित्ती गर्मी में बढ़ती है और ठंडी सिकाई या खुली हवा से आराम मिलता है।

Natrum Mur

जब पित्ती व्यायाम करने या धूप में जाने से शुरू हो। त्वचा पर बड़े आकार के चकत्ते बनते हैं, साथ में तेज़ खुजली और जलन होती है।

Rhus Tox

जब बहुत ज़्यादा खुजलाने से त्वचा लाल, सूजी हुई और जलन वाली हो जाए। रगड़ने से समस्या और बढ़ जाती है। पानी में भीगने के बाद भी पित्ती हो सकती है।

Dulcamara

जब ठंड के संपर्क में आने या गीले मौसम में पित्ती बढ़ जाए, साथ में तेज़ खुजली हो।

Sulphur 

जब गर्मी के संपर्क में आने से चकत्ते बनें, खुजली और जलन हो, और नहाने या खुजलाने से समस्या बढ़ जाए। शाम के समय खुजली ज़्यादा महसूस होती है।

ऊपर बताई गई दवाइयां केवल जानकारी के लिए हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के इन्हें खुद से न लें। सही दवा का चुनाव आपके लक्षणों और केस हिस्ट्री के आधार पर ही किया जाना चाहिए।

Urticaria (पित्ती) में क्या नहीं खाना चाहिए?

हर मरीज़ में पित्ती का ट्रिगर अलग हो सकता है, इसलिए कोई एक सख्त डाइट नियम सभी पर लागू नहीं होता। फिर भी, इन बातों का ध्यान रखना फायदेमंद हो सकता है:

  • अगर मूंगफली, अंडा, गेहूं या शेलफिश जैसे खाद्य पदार्थों से पहले भी एलर्जी रही हो, तो उनसे बचें
  • मसालेदार और अत्यधिक तला-भुना भोजन भड़कने के दौरान परेशानी बढ़ा सकता है
  • शराब का सेवन पित्ती को बढ़ा सकता है
  • अगर किसी खास भोजन के बाद पित्ती बढ़ती महसूस हो, तो उसे नोट करें और डॉक्टर से चर्चा करें

Urticaria (पित्ती) में क्या खाना चाहिए?

पित्ती के लिए कोई एक निश्चित डाइट प्लान नहीं है, लेकिन संतुलित और ताज़ा भोजन शरीर को सहारा दे सकता है।

  • ताज़े फल और सब्जियां
  • हल्का, कम मसाले वाला घर का बना खाना
  • पर्याप्त पानी और तरल पदार्थ
  • ऐसा भोजन जो पहले कभी एलर्जी या परेशानी का कारण न बना हो

बिना डॉक्टर की सलाह के बहुत सारे खाद्य पदार्थ पूरी तरह बंद करने से बचें इससे पोषण की कमी हो सकती है।

एंजियोएडेमा कब यह इमरजेंसी बन सकती है?

ज़्यादातर मामलों में पित्ती हल्की और अस्थायी होती है, लेकिन कभी-कभी इसके साथ चेहरे, होंठों, जीभ या गले में सूजन आ सकती है, जिसे एंजियोएडेमा (angioedema) कहा जाता है। अगर सांस लेने में तकलीफ, गले में जकड़न, या चेहरे-होंठों में अचानक सूजन जैसे लक्षण दिखें, तो यह एक मेडिकल इमरजेंसी हो सकती है ऐसी स्थिति में तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाना चाहिए, घर पर इंतज़ार नहीं करना चाहिए।

Urticaria (पित्ती) से जुड़ी सामान्य गलत धारणाएं 

गलत धारणा 1: पित्ती छूने से फैलती है

सच्चाई: पित्ती संक्रामक (contagious) नहीं है। यह छूने, साथ बैठने या साथ खाने से नहीं फैलती।

गलत धारणा 2: पित्ती हमेशा एलर्जी की वजह से ही होती है

सच्चाई: पित्ती एलर्जी के अलावा तनाव, दवाइयों या ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया की वजह से भी हो सकती है।

गलत धारणा 3: पित्ती हमेशा के लिए रहती है

सच्चाई: ज़्यादातर मामलों में पित्ती कुछ दिनों में ठीक हो जाती है। अगर यह 6 हफ्तों से ज़्यादा समय तक रहे, तो इसे क्रॉनिक (दीर्घकालिक) पित्ती कहा जाता है, जिसके लिए उचित इलाज ज़रूरी है।

डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?

  • पित्ती 6 हफ्तों से ज़्यादा समय तक बनी रहे
  • सांस लेने में तकलीफ या गले में सूजन महसूस हो
  • चेहरे, होंठों या आंखों के आसपास सूजन आए
  • बार-बार पित्ती होती हो और कारण समझ न आए
  • घरेलू उपायों से आराम न मिले

पित्ती के दौरान त्वचा की देखभाल के लिए सुझाव

  • खुजलाने से बचें इससे त्वचा और ज़्यादा खराब हो सकती है
  • ढीले और सूती कपड़े पहनें
  • गर्म पानी से नहाने की बजाय हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें
  • ठंडी सिकाई से खुजली और जलन में आराम मिल सकता है
  • जिस चीज़ से पित्ती ट्रिगर हुई हो, उससे दूरी बनाए रखें

Dr. Tathed's Homeopathy क्यों चुनें?

Dr. Tathed's Homeopathy Clinic में पित्ती का इलाज सिर्फ त्वचा पर दिखने वाले चकत्तों तक सीमित नहीं है। हर मरीज़ की विस्तृत केस हिस्ट्री ली जाती है, जिसमें उनके लक्षण, ट्रिगर, तनाव का स्तर और संपूर्ण स्वास्थ्य को समझा जाता है, ताकि इलाज जड़ से हो सके।

क्लिनिक को विटिलिगो, एक्ज़िमा और अन्य त्वचा संबंधी स्थितियों के इलाज का भी व्यापक अनुभव है। Chinchwad (Pimpri-Chinchwad), Viman Nagar (Pune) और Thane West में क्लिनिक उपलब्ध हैं, साथ ही ऑनलाइन परामर्श की सुविधा भी है।

निष्कर्ष 

पित्ती (urticaria) एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली त्वचा स्थिति है, जो ज़्यादातर मामलों में अपने आप ठीक हो जाती है। अगर आप urticaria meaning in hindi, urticaria ka ilaj या urticaria me kya khana chahiye जैसे सवाल खोज रहे थे, तो अब आप इसके मतलब, कारण, लक्षण और इलाज के बारे में बेहतर समझ रखते हैं।

सही जानकारी, सही खान-पान और ज़रूरत पड़ने पर योग्य डॉक्टर की सलाह यही पित्ती को समझदारी से मैनेज करने का तरीका है।

क्या आपको बार-बार पित्ती की समस्या होती है?

Dr. Tathed's Homeopathy Clinic में अपनी समस्या के लिए व्यक्तिगत परामर्श बुक करें और जानें कि पित्ती का होम्योपैथी उपचार आपके लिए कैसे काम कर सकता है।

Chinchwad (Pimpri-Chinchwad) • Viman Nagar (Pune) • Thane West

कॉल करें: 9405435981 / 8180008068 / 7498996920   |  अपॉइंटमेंट बुक करें

 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) 

Urticaria का हिंदी में मतलब क्या है?

Urticaria को हिंदी में पित्ती या शीतपित्त कहा जाता है। यह त्वचा पर लाल, उभरे हुए और खुजली वाले चकत्तों की एक एलर्जिक स्थिति है।

Urticaria (पित्ती) क्यों होता है?

यह हिस्टामिन के निकलने से होता है, जो एलर्जी, दवाइयों, कीड़े के काटने, तनाव या ऑटोइम्यून प्रतिक्रिया की वजह से ट्रिगर हो सकता है।

Urticaria के लक्षण क्या हैं?

मुख्य लक्षणों में लाल या त्वचा के रंग के उभरे हुए खुजली वाले चकत्ते, जलन, और दबाने पर बीच का हिस्सा सफेद पड़ना शामिल है।

Urticaria का इलाज क्या है?

होम्योपैथी में पित्ती का इलाज मरीज़ के लक्षणों और ट्रिगर के आधार पर व्यक्तिगत रूप से किया जाता है, न कि केवल लक्षणों को दबाकर।

Urticaria में क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

जिन खाद्य पदार्थों से पहले एलर्जी रही हो, उनसे बचें। ताज़ा, हल्का और संतुलित भोजन बेहतर रहता है। हर मरीज़ का ट्रिगर अलग हो सकता है, इसलिए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

क्या Urticaria होम्योपैथी से पूरी तरह ठीक हो सकता है?

होम्योपैथी में मरीज़ के लक्षणों और कारण को समझकर व्यक्तिगत इलाज दिया जाता है, जिससे बार-बार होने वाली पित्ती की समस्या में काफी राहत मिल सकती है। परिणाम हर मरीज़ में अलग हो सकते हैं।

क्या Urticaria संक्रामक (contagious) होता है?

नहीं, पित्ती छूने, साथ बैठने या साथ खाने से नहीं फैलती।

Urticaria कब इमरजेंसी बन सकता है?

अगर पित्ती के साथ सांस लेने में तकलीफ, गले में सूजन या चेहरे-होंठों में अचानक सूजन हो, तो यह इमरजेंसी हो सकती है ऐसे में तुरंत डॉक्टर या नज़दीकी अस्पताल से संपर्क करें।

पित्ती (urticaria) के लिए पुणे, चिंचवड़ या ठाणे में सबसे अच्छा होम्योपैथी डॉक्टर कौन है?

Dr. Tathed's Homeopathy Clinic, Chinchwad (Pimpri-Chinchwad), Viman Nagar (Pune) और Thane West में पित्ती सहित त्वचा से जुड़ी कई समस्याओं का व्यक्तिगत होम्योपैथिक इलाज प्रदान करता है। Dr. Girish Tathed को होम्योपैथी में 30+ वर्षों का क्लिनिकल अनुभव है

References -

https://www.nhs.uk/conditions/hives/

https://www.aad.org/public/diseases/a-z/hives-overview

https://my.clevelandclinic.org/health/diseases/8630-hives